कांवड़ यात्रा 2026 को देखते हुए दिल्ली सरकार ने कांवड़ समितियों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, महंगाई और शिविरों के संचालन में बढ़ते खर्च को देखते हुए अनुदान राशि में वृद्धि का फैसला लिया गया है।
सरकार के प्रस्ताव के तहत बड़े कांवड़ शिविरों को अब अधिक आर्थिक सहायता दी जाएगी। 20,000 वर्गफुट से अधिक क्षेत्र में 6 से 12 दिन तक चलने वाले शिविरों के लिए अनुदान राशि 11 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये तक करने का प्रस्ताव है। वहीं, 3 से 5 दिन चलने वाले ऐसे शिविरों के लिए सहायता राशि 6 लाख से बढ़ाकर 9 लाख रुपये करने की तैयारी है।
इसके अलावा छोटे और मध्यम आकार के शिविरों के लिए भी अनुदान राशि में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का कहना है कि इससे कांवड़ समितियों को बेहतर व्यवस्था करने में मदद मिलेगी और श्रद्धालुओं को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
दिल्ली में हर साल कांवड़ यात्रा के दौरान शिविरों की संख्या बढ़ रही है। सरकार के मुताबिक, वर्ष 2024 में राजधानी में 170 कांवड़ शिविर लगाए गए थे, जबकि 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 308 हो गई। इसी को देखते हुए आर्थिक सहायता में बदलाव की जरूरत महसूस की गई।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पात्र कांवड़ समितियों को पहले की तरह 1,200 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा जारी रहेगी। इससे अधिक बिजली खपत होने पर अतिरिक्त खर्च संबंधित समिति को वहन करना होगा।
अनुदान वितरण प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए भुगतान व्यवस्था में भी बदलाव का प्रस्ताव है। सहायता राशि सीधे जिलाधिकारी कार्यालय के माध्यम से जारी करने की योजना है। राशि का भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए दो किस्तों में किया जाएगा।
कांवड़ यात्रा के दौरान दिल्ली पुलिस और ट्रैफिक पुलिस सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगी। इसके साथ ही रूट डायवर्जन, यातायात प्रबंधन और CCTV निगरानी की व्यवस्था भी की जाएगी। नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, दिल्ली जल बोर्ड और अन्य विभाग मिलकर यात्रा के दौरान आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे।
सरकार ने यह भी सुझाव दिया है कि वर्ष 2025 में जिन कांवड़ समितियों और शिविर स्थलों को मंजूरी दी गई थी, उन्हें ही 2026 में जारी रखा जाए। नए शिविरों को मंजूरी देने पर अभी फैसला नहीं लिया गया है।
कांवड़ समितियों के लिए बढ़ी हुई सहायता राशि से जुड़े प्रस्ताव को दिल्ली कैबिनेट की मंजूरी के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा।


