चेनाप वैली में पर्यटन विकास के दावे बेअसर

Nikhil Malhotra
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‘ट्रेक आफ द ईयर-2025’ के बाद भी बदहाल है चेनाप वैली का ट्रैक रूट

फाइलों और सोशल मीडिया तक सिमटा पर्यटन विकास, न ट्रेल सुधरा और न विकसित हुई कैंप साइट

सोनू उनियाल देहरादून । उत्तराखंड के चमोली जिले में प्राकृतिक सौंदर्य और पुष्प जैव विविधता से समृद्ध चेनाप वैली को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के लिए उत्तराखंड पर्यटन विभाग ने वर्ष 2025 में इसे ट्रेक आफ द ईयर घोषित किया था। घोषणा के बाद स्थानीय लोगों और पर्यटन कारोबारियों में घाटी के विकास और देश-दुनिया में पहचान मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

ज्योतिर्मठ विकासखंड के दूरस्थ गांव थैंग के शीर्ष पर करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई पर सोना शिखर के समीप स्थित चेनाप वैली प्राकृतिक पुष्प संपदा से भरपूर है। इसकी तुलना विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी से की जाती है। इसके बावजूद यहां पहुंचने वाला पैदल संपर्क मार्ग आज भी बेहद जोखिम भरा और बदहाल है। न ट्रैक रूट को व्यवस्थित किया गया है और न ही पर्यटकों के लिए कैंप साइट अथवा अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित हो पाई हैं।

पर्यटन विभाग की ओर से ‘ट्रेक आफ द ईयर-2025’ घोषित किए जाने के बावजूद घाटी में पर्यटकों की आमद मुख्य रूप से गिने-चुने प्रकृति प्रेमियों, ट्रैकर्स और वन्यजीव छायाकारों तक सीमित है। जोखिम भरे रास्तों से होकर ये लोग जान हथेली पर रखकर घाटी तक पहुंच रहे हैं। चेनाप वैली अब गूगल मैप पर जरूर नजर आने लगी है, लेकिन धरातल पर पर्यटन सुविधाओं के विकास की तस्वीर इससे बिल्कुल अलग है

प्रकृति विशेषज्ञों ने किया घाटी का अध्ययन

सितंबर के पहले सप्ताह में देश के जाने-माने प्रकृति विज्ञानी एवं वन्यजीव छायाकार धृति मान मुखर्जी और कुमाऊं क्षेत्र के नेचर एक्सपर्ट चंदन नयाल ने चेनाप वैली का भ्रमण कर इसकी प्राकृतिक संपदा और वर्तमान स्थिति का अध्ययन किया। विशेषज्ञों के अनुसार घाटी की प्राकृतिक सुंदरता अद्भुत है। इस वर्ष यहां बड़ी संख्या में पुष्प वाटिकाएं खिली दिखाई दीं। हालांकि उन्होंने ट्रैक रूट की बदहाली को पर्यटन विकास में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बताया।

विशेषज्ञों का कहना है कि घाटी में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने से पहले पैदल ट्रेल को सुरक्षित और व्यवस्थित करना जरूरी है। ट्रेल की स्थिति सुधरेगी और बुनियादी व्यवस्थाएं विकसित होंगी, तभी पर्यटकों का फ्लो बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए पर्यटन विभाग और वन विभाग को संयुक्त रूप से ठोस कार्ययोजना पर काम करना होगा

प्राकृतिक रूप से बनी ‘मेंड़ और क्यारियां’ हैं खास आकर्षण

चेनाप वैली का सबसे बड़ा आकर्षण यहां प्राकृतिक रूप से बनी मेंड़ और क्यारियां हैं। इन्हें देखकर ऐसा लगता है मानो किसी कुशल किसान ने पुष्प वाटिकाओं को बेहद सलीके से सजाया हो। स्थानीय स्तर पर इन पुष्प क्यारियों को ह्यफुलानाह्ण कहा जाता है। घाटी में ब्रह्मकमल सहित कई दुर्लभ और औषधीय पुष्पों की प्रजातियां देखने को मिलती हैं।

नन्दा देवी राष्ट्रीय पार्क, ज्योतिर्मठ क्षेत्र के ईको टूरिज्म विशेषज्ञ संजय कुंवर के अनुसार चेनाप वैली की पुष्प जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र अभी भी उच्च स्तर पर सुरक्षित है। इस वर्ष भी यहां ब्रह्मकमल और दुर्लभ औषधीय पुष्प फैन कमल अच्छी मात्रा में खिले हैं, जो क्षेत्र के पर्यावरण के लिए सकारात्मक संकेत है। उनका कहना है कि घाटी की प्राकृतिक संवेदनशीलता को देखते हुए यहां रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

पर्यटन विकास के साथ ईको बैलेंस और सस्टेनेबिलिटी बनाए रखना जरूरी है। इसके लिए ट्रेल मैनेजमेंट बेहतर करने के साथ मूलभूत पर्यटन सुविधाओं का विकास भी आवश्यक है

पश्चिम बंगाल के ट्रैकरों में पहले से लोकप्रिय

देश-दुनिया में भले ही चेनाप वैली अभी ज्यादा चर्चित नहीं है, लेकिन पश्चिम बंगाल से आने वाले प्रकृति प्रेमियों और ट्रैकर्स के बीच यह क्षेत्र पहले से पसंदीदा ट्रेक माना जाता है। घाटी में दुर्लभ पुष्पों के साथ वन्यजीव और जड़ी-बूटियों की भी भरपूर विविधता मौजूद है। स्थानीय लोगों और पर्यटन कारोबारियों को उम्मीद थी कि ‘ट्रेक आफ द ईयर-2025’ की घोषणा के बाद चेनाप वैली में बुनियादी सुविधाओं का विकास होगा और क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।

लेकिन फिलहाल पर्यटन विकास का असर फाइलों और प्रचार तक ही सीमित नजर आ रहा है। अब सवाल यह है कि जब घाटी को ‘ट्रेक आॅफ द ईयर’ घोषित किया गया था, तो एक साल बाद भी ट्रैक रूट और बुनियादी सुविधाएं बदहाल क्यों हैं

स्रोत: www.thehindipioneer.com

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