उत्तर प्रदेश के मथुरा में फरसा बाबा की असामयिक मौत के बाद उनके शिष्यों और स्थानीय समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई। फरसा बाबा, जिनका असली नाम चंद्रशेखर था और जो सिरसागंज, फिरोजाबाद के रहने वाले थे, ने छोटी उम्र में संन्यास ले लिया और अपना जीवन गौ सेवा को समर्पित कर दिया। बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय वह अयोध्या गए और बाद में मथुरा में बरसाना के पास आजनौख गांव में बसकर गौ सेवा शुरू की। उन्होंने गौशाला बनाई और गौ रक्षा दल का गठन किया।
फरसा बाबा पिछले कुछ सालों से गौ तस्करी के खिलाफ सक्रिय रहे और अपने प्राइवेट टीम के साथ तस्करों को पकड़कर पुलिस के हवाले करते थे। शनिवार को हरियाणा बॉर्डर के पास उन्हें और ट्रक ड्राइवर को एक एक्सीडेंट में मौत हो गई। मथुरा के डीएम चंद्र प्रकाश ने बताया कि बाबा का इस क्षेत्र में गौ सेवा के लिए बड़ा योगदान था और उनकी असामयिक मृत्यु से लोगों में दुख की लहर है।
घटना के बाद उनके आश्रम जा रहे दक्ष चौधरी को पुलिस ने हिरासत में लिया। इससे नाराज शिष्यों ने पुलिस का विरोध किया और दक्ष चौधरी की रिहाई की मांग की। डीएम ने कहा कि प्रशासन ने जनता के साथ बातचीत की और आश्वासन दिया कि बाबा के शिष्यों और गौशाला को कोई परेशानी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यदि गौ रक्षकों को पात्रता मिलेगी, तो उन्हें नियम के तहत लाइसेंस दिया जाएगा और राजस्थान की तरह टास्क फोर्स बनाने का विचार भी चल रहा है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरी और पंचदशनाम जूना अखाड़े के जगतगुरु स्वामी चक्रपाणि नंद गिरी महाराज ने भी फरसा बाबा की मौत पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि बाबा राष्ट्र रक्षा, धर्म रक्षा और गौ रक्षा के लिए समर्पित थे और उनकी असामयिक मृत्यु समाज के लिए बड़ा आघात है।
प्रशासन ने साफ किया कि हिरासत में लिए गए लोग जल्द ही रिहा कर दिए जाएंगे और किसी भी अफवाह पर ध्यान नहीं दिया जाएगा। एक्सीडेंट की पूरी जांच की जा रही है।
