उत्तर प्रदेश के मेरठ में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था और सरकारी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि मात्र दो कमरों वाले एक मदरसे में 5500 छात्रों का फर्जी दाखिला दिखाकर करीब 4 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति राशि का गबन किया गया।
आर्थिक अपराध शाखा (आर्थिक अपराध शाखा (EOW)) की जांच में सामने आया है कि यह फर्जीवाड़ा वर्ष 2010-11 से 2015-17 के बीच अल्पसंख्यक प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत किया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, कई मदरसा संचालकों, स्कूल प्रबंधकों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा घोटाला अंजाम दिया गया।
जांच में यह भी पाया गया कि 60 वर्ग गज के छोटे से परिसर में हजारों छात्रों का दाखिला दिखाना पूरी तरह असंभव था, फिर भी कागजों में फर्जी रिकॉर्ड तैयार कर सरकारी धन को खातों में ट्रांसफर कराया गया। शुरुआती जांच में मेरठ के 135 से अधिक मदरसों और स्कूलों में इस तरह की गड़बड़ियों की बात सामने आई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब तक 90 से अधिक मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं और करीब 180 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें मदरसा संचालक, स्कूल प्रबंधक, कोषाध्यक्ष और कुछ तत्कालीन विभागीय अधिकारी शामिल हैं। हाल ही में जांच एजेंसी ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि कई अन्य अभी फरार हैं।
मेरठ का यह छात्रवृत्ति घोटाला अब प्रदेश के सबसे बड़े शिक्षा घोटालों में गिना जा रहा है। इस मामले ने सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था और डेटा सत्यापन प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


