उत्तराखंड: विश्व प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम यात्रा इस बार एक नई व्यवस्था को लेकर चर्चा में है। करीब 5 किलोमीटर लंबे पैदल यात्रा मार्ग पर भीड़ और अव्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने चार बाउंसर तैनात किए हैं।
क्यों की गई बाउंसरों की तैनाती?
यात्रा सीजन में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ ही डंडी-कंडी और घोड़ा-खच्चर संचालकों की भीड़ भी बढ़ जाती है। कई बार बिना टोकन के संचालन और रोटेशन सिस्टम तोड़ने को लेकर विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है। इसी को नियंत्रित करने के लिए जिला पंचायत की कुली एजेंसी ने यह कदम उठाया है।
टोकन व्यवस्था पर सख्ती
तैनात किए गए बाउंसर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि केवल वैध टोकन या पर्ची वाले घोड़ा-खच्चर और डंडी-कंडी संचालक ही यात्रियों को आगे ले जा सकें। नियमों का उल्लंघन करने वालों को रोककर वापस भेजा जा रहा है ताकि व्यवस्था बनी रहे।
एक बाउंसर के अनुसार, उनका काम केवल नियमों का पालन सुनिश्चित करना और भीड़भाड़ को नियंत्रित करना है, जिससे किसी प्रकार का विवाद न हो।
स्थानीय लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग राय सामने आई है। कुछ लोगों का कहना है कि पहले से ही पुलिस और सुरक्षा बल तैनात हैं, ऐसे में बाउंसरों की जरूरत नहीं थी और इससे डर का माहौल बन सकता है।
वहीं, कई लोग इस कदम को सकारात्मक मान रहे हैं। उनका कहना है कि यात्रा सीजन में भीड़ नियंत्रण और अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्ती जरूरी है, ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।
प्रशासन का उद्देश्य
प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था का मकसद केवल यात्रा को सुचारू और सुरक्षित बनाना है, ताकि सभी श्रद्धालु बिना किसी अव्यवस्था के दर्शन कर सकें। फिलहाल यह नई व्यवस्था चर्चा का विषय बनी हुई है और यात्रा मार्ग पर इसका असर देखा जा रहा है।


