भारत का तेल स्टॉक कितना सुरक्षित? CAG रिपोर्ट ने उठाए सवाल

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भारत के रणनीतिक कच्चे तेल भंडार को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालिया विश्लेषण के मुताबिक, देश के पास मौजूद रणनीतिक तेल भंडार सिर्फ़ करीब 5 दिन की ज़रूरतें पूरी कर सकते हैं, क्योंकि कुल क्षमता का एक-तिहाई से ज़्यादा हिस्सा खाली पड़ा है।

हालांकि, सरकार का कहना है कि कुल मिलाकर देश के पास लगभग 74 दिन की तेल मांग को पूरा करने लायक भंडारण क्षमता मौजूद है, जिसमें तेल विपणन कंपनियों का स्टॉक भी शामिल है।

क्या कहती है CAG रिपोर्ट?

Comptroller and Auditor General of India (CAG) की 2025 की ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत के रणनीतिक भंडार का पूरा इस्तेमाल नहीं हो रहा है।

देश के पास 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कच्चे तेल को स्टोर करने की क्षमता है, लेकिन इसमें से केवल 3.37 MMT ही भरा हुआ है। यानी एक बड़ा हिस्सा अब भी खाली है।

भारत रोज़ाना लगभग 0.67 MMT तेल की खपत करता है, ऐसे में मौजूदा रणनीतिक भंडार सिर्फ़ 5 दिन तक ही पर्याप्त हैं।

सरकार का क्या कहना है?

Narendra Modi ने राज्यसभा में कहा कि देश में पेट्रोल और डीज़ल का पर्याप्त स्टॉक है और सरकार ने आयात के स्रोतों को विविध बनाया है।

वहीं पेट्रोलियम राज्य मंत्री Suresh Gopi के अनुसार, कुल भंडारण क्षमता का लगभग 64% हिस्सा भरा हुआ है।

आयात पर भारी निर्भरता

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और अपनी ज़रूरतों का 88% से ज़्यादा आयात करता है।

2025 में भारत के कुल तेल आयात का आधे से ज़्यादा हिस्सा मध्य-पूर्व से आया, जिसमें इराक़, सऊदी अरब और यूएई प्रमुख सप्लायर रहे।

क्यों अहम हैं रणनीतिक भंडार?

रणनीतिक तेल भंडार का इस्तेमाल आपात स्थिति, युद्ध या वैश्विक आपूर्ति में रुकावट के समय किया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को:

  • भंडारण क्षमता बढ़ानी चाहिए
  • नवीकरणीय ऊर्जा पर ज़ोर देना चाहिए
  • घरेलू उत्पादन को मज़बूत करना चाहिए

Kirit Parikh के अनुसार, तेल की मांग कम करना भी एक प्रभावी रणनीति हो सकती है।

वैश्विक तुलना में भारत कहाँ?

अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार:

  • Japan के पास ~208 दिन का भंडार
  • South Korea के पास ~200 दिन
  • China के पास ~120 दिन

वहीं भारत की कुल क्षमता (रणनीतिक + कंपनियों का स्टॉक) सिर्फ़ लगभग 74 दिन है।

आगे की चुनौती

CAG रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भंडारण क्षमता बढ़ाने की प्रगति धीमी रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि तेल के ऊंचे दाम (110–120 डॉलर प्रति बैरल) के समय भंडार बढ़ाना महंगा साबित हो सकता है, इसलिए सही समय पर निवेश करना बेहद ज़रूरी है।

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