अखिलेश यादव की रैलियां रद्द होने पर RLD का तंज, ‘AC से निकलकर जमीन पर आइए’

shikha verma
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 समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के ‘चवन्नी’ वाले बयान को लेकर समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के बीच सियासी बयानबाजी तेज होती जा रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के प्रस्तावित कार्यक्रमों के रद्द होने को लेकर अब रालोद ने सपा पर निशाना साधा है।

रालोद प्रवक्ता रोहित अग्रवाल ने दावा किया है कि पश्चिमी यूपी में 36 बिरादरी के विरोध के चलते सपा को पहले सहारनपुर और अब बुलंदशहर में प्रस्तावित रैली रद्द करनी पड़ी। अखिलेश यादव का 11 सितंबर को बुलंदशहर दौरा प्रस्तावित था, जिसे अब रद्द कर दिया गया है। इससे पहले उनका सहारनपुर दौरा भी रद्द हुआ था।

‘समझ आ गया होगा कि पश्चिमी यूपी में चौधरी कौन है’

रोहित अग्रवाल ने एक वीडियो जारी कर अखिलेश यादव पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अब सपा अध्यक्ष को समझ आ गया होगा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ‘चौधरी’ कौन है।

अग्रवाल ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने उस चौधरी परिवार का अपमान करने की कोशिश की, जिसने उनके परिवार को राजनीति की ‘एबीसीडी’ सिखाने का काम किया। हालांकि, रालोद प्रवक्ता के इन आरोपों पर सपा की ओर से इस खबर के लिखे जाने तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

‘एसी कमरों से नहीं, जमीन पर उतरकर मांगना होगा वोट’

रालोद प्रवक्ता ने कहा कि समाज को बांटने की राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि एसी कमरों और ऑडिटोरियम में बैठकर राजनीतिक बातें करना आसान है, लेकिन चुनाव के दौरान नेताओं को जनता के बीच जाना पड़ता है।

उन्होंने दावा किया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश का किसान अपने सम्मान के मुद्दे पर लामबंद है और आगामी चुनाव में इसका जवाब दिया जाएगा।

2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर RLD का बड़ा दावा

रोहित अग्रवाल ने 2027 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी को वोट मांगने के लिए जमीन पर उतरना पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता जाट समाज और चौधरी परिवार के कथित अपमान का जवाब चुनाव में देगी।

अग्रवाल ने यह भी दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा पश्चिमी यूपी में एक-एक सीट के लिए तरस जाएगी और उसका खाता तक नहीं खुलेगा। यह रालोद का राजनीतिक दावा है, जिसकी पुष्टि चुनाव परिणाम आने के बाद ही हो सकेगी।

अखिलेश यादव के ‘चवन्नी’ वाले बयान पर क्यों मचा विवाद?

विवाद की शुरुआत अखिलेश यादव के 17 अगस्त को लखनऊ में दिए गए एक बयान से हुई। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बिना नाम लिए रालोद प्रमुख जयंत चौधरी पर तंज कसते हुए कहा था कि गठबंधन में ऐसे लोग भी आए थे, जिन्हें उन्होंने ‘चवन्नी से रुपया’ बनाया, लेकिन इसके बावजूद वे उनका साथ छोड़कर चले गए।

इस बयान के बाद रालोद नेताओं ने अखिलेश यादव पर जयंत चौधरी और चौधरी परिवार को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया।

सपा प्रदेश अध्यक्ष के बयान से भी बढ़ी तल्खी

मामला उस समय और गरमा गया जब सपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने मुजफ्फरनगर में बयान देते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ने ‘चवन्नी को रुपया’ बनाने का काम किया है।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों को राजनीति की एबीसीडी तक नहीं आती थी, उन्हें समाजवादी पार्टी ने राजनीतिक मंच दिया और आगे बढ़ने का अवसर दिया।

इन बयानों के बाद रालोद नेताओं ने आरोप लगाया कि सपा की टिप्पणी चौधरी चरण सिंह के परिवार और जाट समाज के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाली है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दोनों दलों के बीच बढ़ती बयानबाजी ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।

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