कहानियों से साक्षरता की मजबूत नींव रखेगी प्रदेश सरकार, बालवाटिका में होगा ‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ अभियान

Nikhil Malhotra
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अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर 8 सितंबर को प्रदेशभर में आयोजन, बच्चों में भाषा, कल्पनाशीलता और रचनात्मक सोच विकसित करने पर जोरलखनऊ, 7 सितंबर। मुख्यमंत्री योगी…

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर 8 सितंबर को प्रदेशभर में आयोजन, बच्चों में भाषा, कल्पनाशीलता और रचनात्मक सोच विकसित करने पर जोरलखनऊ, 7 सितंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बच्चों की बुनियादी शिक्षा को बालवाटिका स्तर से ही मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

इसी क्रम में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर 8 सितंबर को प्रदेश के सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों, बालवाटिकाओं और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में ‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ अभियान आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम के माध्यम से कहानी को बच्चों के सीखने का सहज और आनंददायक माध्यम बनाते हुए उनमें सुनने, समझने, अपनी बात कहने, कल्पनाशीलता और रचनात्मक सोच जैसी क्षमताओं के विकास पर जोर दिया जाएगा।

सीखने को आनंद और रचनात्मकता से जोड़ रही सरकार: संदीप सिंहबेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत आधार देने के लिए सीखने की प्रक्रिया को आनंद और रचनात्मकता से जोड़ रही है। उन्होंने कहा कि ‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ जैसी गतिविधियां बालवाटिका के बच्चों में भाषा कौशल, कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

उन्होंने कहा कि प्रारंभिक अवस्था में बच्चों को सीखने के लिए सहज और रुचिकर वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है। कहानी सुनने और उस पर संवाद करने से बच्चे स्वाभाविक रूप से सीखने की प्रक्रिया से जुड़ते हैं। कहानी बच्चों के सीखने और अपनी बात कहने का सहज माध्यममहानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि कहानी बच्चों के सीखने, सोचने और अपनी बात कहने का सहज माध्यम है।

उनके निर्देशों पर आयोजित इस गतिविधि का उद्देश्य कहानी के माध्यम से बच्चों में सुनने, समझने, संवाद करने, कल्पना करने और रचनात्मक सोच विकसित करना है। उन्होंने कहा कि कहानी आधारित गतिविधियों के जरिए बालवाटिका में बच्चों की कल्पनाशीलता को प्रोत्साहित करते हुए साक्षरता की मजबूत नींव तैयार करने में मदद मिलेगी। कहानी के बाद बच्चे बनाएंगे चित्र, करेंगे संवादको-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में स्वागत एवं स्वतंत्र खेल के बाद कहानी सत्र आयोजित किया जाएगा।

इसके लिए राज्य स्तर से उपलब्ध बिग बुक अथवा स्थानीय कहानियों में से बच्चों की आयु के अनुरूप ऐसी कहानी का चयन किया जाएगा, जिसमें मनोरंजन के साथ कोई नैतिक संदेश भी हो। कहानी सुनाने के दौरान बच्चों से बंद और खुले छोर वाले प्रश्न पूछे जाएंगे। उन्हें अपने तरीके से उत्तर देने और कहानी पर विचार व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कहानी समाप्त होने के बाद बच्चों को उससे जुड़े चित्र बनाने का अवसर दिया जाएगा। साथ ही बच्चे अपने बनाए चित्र के बारे में अपनी बात भी साझा करेंगे।

इस तरह गतिविधि को केवल कहानी सुनने तक सीमित न रखते हुए उसे संवाद, प्रश्नोत्तर, कल्पना और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जोड़ा जाएगा। डायट में भी होंगे कहानी वाचन और रचनात्मक कार्यक्रमजिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) स्तर पर भी कहानी वाचन, संवाद, प्रश्नोत्तर और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों में आसपास की बालवाटिकाओं के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, एकेडमिक रिसोर्स पर्सन, बच्चों और अभिभावकों को आमंत्रित किया जाएगा।

बच्चों को कागज और रंग उपलब्ध कराकर कहानी से संबंधित चित्र बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। बच्चों द्वारा बनाए गए चित्रों को प्रदर्शित कर उनकी सराहना भी की जाएगी, ताकि उनमें आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की भावना विकसित हो। प्रधानाध्यापक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की रहेगी सहभागिताप्रदेश की सभी बालवाटिकाओं में कार्यक्रम के दौरान प्रधानाध्यापक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और शिक्षण सहयोगियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।

सरकार का जोर गतिविधि को बच्चों के लिए सहज, आनंददायक और सहभागितापूर्ण बनाने पर है। ‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ अभियान के जरिए बच्चों को कम उम्र से ही भाषा और संवाद से जोड़ने के साथ उनकी कल्पनाशक्ति तथा रचनात्मक क्षमता को विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। इसके माध्यम से बालवाटिका स्तर पर साक्षरता और बुनियादी शिक्षा की मजबूत आधारशिला तैयार करने की दिशा में एक और कदम उठाया जाएगा

स्रोत: readnownews.in

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