योगी सरकार प्रदेश में गो संरक्षण अभियान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है। अभियान के तहत युवाओं, विशेषकर जेन जी को गोवंश संरक्षण, गो सेवा और इसके सामाजिक, पर्यावरणीय एवं आर्थिक महत्व से जोड़ा जाएगा। इसके लिए गांव-गांव करीब 10 हजार ‘गो मित्र’ तैयार किए जाएंगे। पहले मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षित किया जाएगा, जिसके बाद वे अन्य लोगों को प्रशिक्षण देंगे। गो संरक्षण और गो सेवा के प्रति पहले से रुचि रखने वाले लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार की योजना गो संरक्षण को केवल गो आश्रय स्थलों तक सीमित रखने के बजाय इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तीकरण, हरित ऊर्जा और स्थानीय रोजगार से जोड़ने की है। इसके माध्यम से गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने और गांवों में आय के नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया जा रहा है।
बच्चों और युवाओं को गो संरक्षण से जोड़ने पर जोर
गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो संरक्षण को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल किया है। नई पहल में बच्चों और युवाओं को विशेष रूप से जोड़ा जाएगा। गांवों में जागरूकता अभियान चलाकर नई पीढ़ी को देसी गोवंश, गो सेवा, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण जीवन में गाय के महत्व की जानकारी दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि अभियान के लिए मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे। प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर गांवों में अन्य लोगों को प्रशिक्षण देकर गो संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाएंगे। इससे प्रदेशभर में प्रशिक्षित ‘गो मित्रों’ का नेटवर्क तैयार करने की योजना है।
7,500 से अधिक गो आश्रय स्थलों में 12 लाख से ज्यादा गोवंश
प्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण और भरण-पोषण के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। राज्य में 7,500 से अधिक गो आश्रय स्थल संचालित हैं, जहां 12 लाख से ज्यादा गोवंश संरक्षित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य निराश्रित पशुओं को सुरक्षित आश्रय देने के साथ किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को कम करना भी है।
सरकार ने गोवंश के भरण-पोषण के लिए मिलने वाली सहायता राशि को भी बढ़ाया है। प्रति गोवंश प्रतिदिन दी जाने वाली राशि 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये की गई है। अधिकांश गो आश्रय स्थलों में सीसीटीवी के जरिए निगरानी की व्यवस्था भी की गई है।
1.15 लाख पशुपालकों को दिए गए 1.85 लाख से अधिक गोवंश
गो संरक्षण में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन को भी गति दी गई है। इसके तहत करीब 1.15 लाख पशुपालकों को लगभग 1.85 लाख गोवंश सौंपे गए हैं। इससे गोवंश को परिवार आधारित संरक्षण मिलने के साथ पशुपालकों को भी इससे जुड़े आर्थिक अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख पशुधन राज्यों में शामिल है और दुग्ध उत्पादन में भी अग्रणी है। सरकार अब पशुधन क्षेत्र की इस क्षमता का इस्तेमाल ग्रामीण आय और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए करने पर जोर दे रही है।
गोशालाओं को गो-आधारित उद्योगों से जोड़ने की तैयारी
योगी सरकार गोशालाओं को विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में गोबर से गो-काष्ठ, गो-पेंट, वर्मीकम्पोस्ट, धूपबत्ती, अगरबत्ती, गमले और दीपक जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा पंचगव्य, घनामृत और जीवामृत जैसे उत्पादों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
इन गतिविधियों में महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाई जा रही है, जिससे ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर मिल सकें। गोबर को अपशिष्ट के बजाय खाद, ऊर्जा और विभिन्न उपयोगी उत्पादों के लिए संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर है।
स्थानीय संसाधनों के आधार पर विकसित होंगी गो-आधारित गतिविधियां
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग की ओर से प्रदेश की गोशालाओं की क्षमता और उपलब्ध संसाधनों का मूल्यांकन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रत्येक जिले की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप गो-आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
जिन जिलों में बायोगैस की संभावनाएं अधिक होंगी, वहां हरित ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं अन्य क्षेत्रों में जैविक खाद, गो-काष्ठ और गोमूत्र आधारित उत्पादों की इकाइयां विकसित करने पर जोर रहेगा। सरकार का लक्ष्य गो संरक्षण को स्थानीय रोजगार से जोड़ते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए स्रोत तैयार करना है।


