उत्तर प्रदेश में मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए योगी सरकार की पहल अब प्रभावी साबित हो रही है। गोरखपुर में ट्रायल के तौर पर शुरू किया गया ‘मातृ सेवा’ मॉडल हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं के लिए जीवनरक्षक साबित हो रहा है।
इस पहल के तहत गंभीर गर्भावस्था वाले मामलों की तुरंत पहचान कर उन्हें बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। बीते दो महीनों में इस व्यवस्था के जरिए 15 अतिगंभीर पोस्टपार्टम हैमरेज (प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव), 43 गंभीर एनीमिया और 19 एक्लम्पसिया के मरीजों की जान बचाई गई है।
अब आसपास के जिलों के हाईरिस्क मरीजों को भी बेहतर इलाज के लिए गोरखपुर रेफर किया जा रहा है।
व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़ी पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि उत्तर प्रदेश टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (UPTSU) और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयास से यह पहल शुरू की गई है।
इसके तहत एम्स गोरखपुर, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जिला महिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सीएमओ कार्यालय और अस्पतालों के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षकों को एक व्हाट्सऐप ग्रुप से जोड़ा गया है।
इस नेटवर्क में आशा कार्यकर्ता, एएनएम, नर्स, एंबुलेंस कोऑर्डिनेटर और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी भी शामिल हैं। जैसे ही किसी हाईरिस्क गर्भवती महिला की पहचान होती है, तुरंत संबंधित टीम को अलर्ट किया जाता है और जरूरत के अनुसार बड़े अस्पताल में रेफर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।
दो महीने में 363 हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं का इलाज
सीएमओ डॉ. राजेश झा के अनुसार, 21 मई से शुरू हुए इस अभियान के तहत अब तक 363 हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं का इलाज किया जा चुका है। इनमें 55 महिलाएं पोस्टपार्टम हैमरेज की समस्या से जूझ रही थीं।
इनमें 15 मामले बेहद गंभीर थे, जिन्हें समय पर इलाज और बेहतर समन्वय के कारण बचाया जा सका। इसके अलावा 43 गंभीर एनीमिया और 19 एक्लम्पसिया के मामलों में भी सफल उपचार किया गया।
उन्होंने बताया कि इस पायलट प्रोजेक्ट की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। यदि इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाता है तो यह मातृ मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
तुरंत कार्रवाई से बची देवरिया की महिला की जान
‘मातृ सेवा’ मॉडल की सफलता का उदाहरण देवरिया का एक मामला भी है। देवरिया की रहने वाली 34 वर्षीय रिंकी देवी ने पथरदेवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बच्चे को जन्म दिया था।
प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी हालत गंभीर हो गई। उन्हें रात में देवरिया मेडिकल कॉलेज लाया गया, जहां उन्हें हेमोरेजिक शॉक की स्थिति में पाया गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देवरिया की टीम ने तुरंत गोरखपुर रेफरल ट्रैकिंग टीम को सूचना दी। इसके बाद बीआरडी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी टीम को अलर्ट किया गया।
रात करीब 2 बजे मरीज को बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने तत्काल जीवन रक्षक उपचार शुरू किया और ब्लड चढ़ाया। बेहतर तालमेल और समय पर इलाज से महिला की हालत में सुधार हुआ और अब वह खतरे से बाहर है।
पूरे प्रदेश के लिए मॉडल बन सकता है गोरखपुर
योगी सरकार की इस पहल ने यह साबित किया है कि समय पर पहचान, तेज रेफरल और बेहतर विभागीय समन्वय से हाईरिस्क गर्भावस्था के मामलों में कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। गोरखपुर का ‘मातृ सेवा’ मॉडल आने वाले समय में पूरे प्रदेश में मातृ स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने का आधार बन सकता है।


