योगी सरकार की पहल, यूपी बनेगा भारतीय ज्ञान परंपरा और शोध का वैश्विक केंद्र

shikha verma
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उत्तर प्रदेश में भारतीय ज्ञान परंपरा को उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अब ‘भारतीय ज्ञान परंपरा संवर्धन शोधपीठ’ स्थापित की जाएंगी। इन शोधपीठों के माध्यम से वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, भारतीय दर्शन, विज्ञान और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषयों पर शोध को बढ़ावा दिया जाएगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शुरू की जा रही इस योजना का उद्देश्य भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ना और इसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है।

50 साल पुराने संस्थान कर सकेंगे आवेदन

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के अनुसार, शोधपीठों की स्थापना के लिए संस्थानों की पात्रता तय की गई है। ऐसे विश्वविद्यालय और महाविद्यालय आवेदन कर सकेंगे, जिनकी स्थापना को कम से कम 50 वर्ष पूरे हो चुके हों।

इसके अलावा संस्थान में 5,000 से अधिक छात्र संख्या होना और यूजीसी अधिनियम की धारा 2(f) एवं 12(B) के तहत मान्यता प्राप्त होना अनिवार्य होगा।

हर शोधपीठ को मिलेगा 2 करोड़ रुपये का अनुदान

योगी सरकार चयनित शोधपीठों को पांच वर्षों के लिए 2 करोड़ रुपये का एकमुश्त अनुदान देगी। यह राशि फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में सुरक्षित रखी जाएगी और इससे मिलने वाले ब्याज का उपयोग शोध गतिविधियों, संचालन और शैक्षणिक कार्यक्रमों में किया जाएगा।

इसके अलावा शोधपीठों के लिए CSR, दान और अन्य वैधानिक माध्यमों से भी संसाधन जुटाए जा सकेंगे।

भारतीय ज्ञान-विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों पर होगा शोध

इन शोधपीठों में वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, जैन और बौद्ध दर्शन, आयुर्वेद, योग, भारतीय गणित, खगोल विज्ञान, स्थापत्य कला, कृषि विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर शोध किया जाएगा।

पीएचडी, पोस्ट-डॉक्टरेट और अन्य शोधार्थियों को शोध अनुदान और शैक्षणिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।

दुर्लभ ग्रंथों और पांडुलिपियों का होगा डिजिटलीकरण

योजना के तहत प्राचीन ग्रंथों, दुर्लभ पांडुलिपियों और शोध सामग्री का डिजिटलीकरण किया जाएगा। इन्हें ओपन-एक्सेस डिजिटल लाइब्रेरी और एमओओसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश-विदेश के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं तक पहुंचाया जाएगा।

इसके साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, कार्यशाला, व्याख्यानमाला तथा भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू किए जाएंगे।

विशेषज्ञ समिति करेगी निगरानी

शोधपीठों के संचालन के लिए प्रत्येक संस्थान में कुलपति या प्राचार्य की अध्यक्षता में संचालन समिति बनाई जाएगी। इसमें विषय विशेषज्ञ, वित्त अधिकारी और बाहरी विशेषज्ञ शामिल होंगे।

शोधपीठों के चयन के लिए उच्च शिक्षा विभाग की पांच सदस्यीय समिति प्रस्तावों की समीक्षा करेगी और योग्य संस्थानों को मंजूरी दी जाएगी।

भारतीय ज्ञान परंपरा का वैश्विक केंद्र बनेगा यूपी

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि यह पहल युवाओं में भारतीय संस्कृति, दर्शन और ज्ञान परंपरा के प्रति गौरव और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करेगी।

उन्होंने कहा कि इन शोधपीठों के माध्यम से उत्तर प्रदेश भारतीय ज्ञान-विज्ञान, संस्कृति और अनुसंधान के क्षेत्र में देश और दुनिया में नई पहचान स्थापित करेगा।

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