देश में प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026’ को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही संशोधित कानून पूरे देश में लागू हो गया है।
- राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बना संशोधन विधेयक
- पेपर लीक माफिया और नकल गिरोहों पर कसेगा शिकंजा
- UPSC, SSC, RRB और NTA समेत सभी प्रमुख परीक्षाएं दायरे में
- अपराधों पर बढ़ाई गई सजा और जुर्माना
- दो महीने में जांच, तीन महीने में ट्रायल का लक्ष्य
- सरकार ने बताया ऐतिहासिक कदम
- तकनीक से मजबूत होगी परीक्षा व्यवस्था
नए कानून में पेपर लीक, संगठित नकल, तकनीकी सेंधमारी और परीक्षा में किसी भी प्रकार की धांधली करने वालों के खिलाफ पहले से अधिक कड़े प्रावधान किए गए हैं। इसमें सख्त सजा, भारी जुर्माना और मामलों के शीघ्र निपटारे की व्यवस्था शामिल है।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बना संशोधन विधेयक
सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने और अनियमितताओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाए गए इस संशोधन विधेयक को संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया था।
राष्ट्रपति की सहमति मिलते ही यह विधेयक अब कानून का रूप ले चुका है। यह संशोधन पहले से लागू लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम में कई महत्वपूर्ण बदलाव करता है।
पेपर लीक माफिया और नकल गिरोहों पर कसेगा शिकंजा
नए कानून का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में होने वाली गड़बड़ियों को रोकना है। इसके तहत पेपर लीक करने वाले गिरोह, परीक्षा एजेंसियों से जुड़े दोषी सेवा प्रदाता, कोचिंग संस्थान और किसी भी तरह की मिलीभगत करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कानून के दायरे में प्रश्नपत्र लीक, उत्तर कुंजी लीक, उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़, कंप्यूटर सिस्टम से हेरफेर, फर्जी वेबसाइट, फर्जी एडमिट कार्ड और संगठित नकल जैसे अपराध शामिल किए गए हैं।
UPSC, SSC, RRB और NTA समेत सभी प्रमुख परीक्षाएं दायरे में
संशोधित कानून के तहत संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) तथा केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाएं शामिल होंगी।
अपराधों पर बढ़ाई गई सजा और जुर्माना
नए प्रावधानों के तहत परीक्षा संबंधी अपराधों में सजा और जुर्माने को और कठोर किया गया है।
- अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर 5 से 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान
- अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया गया
- संगठित अपराध में 7 से 10 वर्ष तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना
- दोषी सेवा प्रदाताओं पर 5 करोड़ रुपये तक जुर्माना
- दोषी सेवा प्रदाताओं को 8 वर्ष तक सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े कार्यों से प्रतिबंधित किया जा सकेगा
दो महीने में जांच, तीन महीने में ट्रायल का लक्ष्य
नए कानून के तहत परीक्षा संबंधी अपराधों की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित की जाएगी। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था की जाएगी, जहां जल्द निपटारे का प्रयास किया जाएगा।
इसके लिए विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का भी प्रावधान किया गया है।
सरकार ने बताया ऐतिहासिक कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कानून को पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं को सुरक्षित बनाने और युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए लगातार काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
तकनीक से मजबूत होगी परीक्षा व्यवस्था
सरकार ने परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए कई सुधार लागू किए हैं। इनमें ऑनलाइन आवेदन प्रणाली, साइबर सुरक्षा, आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, एआई आधारित फेस ऑथेंटिकेशन, सीसीटीवी निगरानी, सिग्नल जैमर और शिकायत निवारण प्रणाली जैसे उपाय शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि नए कानून से मेहनती अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा होगी और सार्वजनिक परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी एवं योग्यता आधारित बनाया जा सकेगा।


