बच्चों को अनावश्यक स्मार्टफोन न दें, अभिभावक स्वयं भी करें संयम : मुख्यमंत्री योगी

shikha verma
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बच्चों में स्मार्टफोन का बढ़ता उपयोग चिंता का विषय बनता जा रहा है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को अनावश्यक रूप से स्मार्टफोन देने से बचें और स्वयं भी इसके उपयोग में संयम बरतें। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि परिवार सप्ताह में कम से कम एक दिन ऐसा निर्धारित करे, जब सभी सदस्य स्मार्टफोन का उपयोग न करें।

गोरखनाथ मंदिर में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं सात दिवसीय श्रीराम कथा के समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बच्चे प्रतिदिन पांच से छह घंटे तक स्मार्टफोन पर समय व्यतीत कर रहे हैं। इससे उनकी आंखों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित हो रही है और वे तनाव एवं अवसाद जैसी मानसिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कई बार ऐसी परिस्थितियां बच्चों को आत्मघाती कदम उठाने तक के लिए प्रेरित कर देती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे बच्चों को स्मार्टफोन उपलब्ध कराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि अभिभावक स्वयं अपने व्यवहार में बदलाव लाएंगे, तभी बच्चों में भी सकारात्मक आदतें विकसित होंगी। परिवार के सभी सदस्यों को आपस में संवाद बढ़ाना चाहिए और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं सकारात्मक सामग्री उपलब्ध करानी चाहिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आषाढ़ पूर्णिमा महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाई जाती है। महर्षि वेदव्यास ने वेदों और पुराणों की ज्ञान परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने का महान कार्य किया। उन्होंने कहा कि गुरु केवल दीक्षा देने वाला ही नहीं होता, बल्कि जीवन में जिससे भी ज्ञान और प्रेरणा प्राप्त होती है, वह गुरु के समान सम्मान का अधिकारी है। माता-पिता, शिक्षक और बड़े-बुजुर्ग सभी समाज निर्माण में गुरु की भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से भारत की योग परंपरा को वैश्विक पहचान मिली है और आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पूरी दुनिया में मनाया जाता है। भारत की ऋषि परंपरा ने अनुसंधान, नवाचार और ज्ञान को संरक्षित करने का कार्य किया, जिसकी अमूल्य धरोहर आज भी पांडुलिपियों, ताम्रपत्रों, सिक्कों और अन्य ऐतिहासिक अवशेषों के रूप में सुरक्षित है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की प्राचीन ज्ञान परंपरा का सबसे बड़ा केंद्र है। अयोध्या, काशी, मथुरा, वृंदावन, गोरखपुर, लखनऊ और उन्नाव सहित अनेक जिलों से बड़ी संख्या में प्राचीन पांडुलिपियां और ऐतिहासिक धरोहरें प्राप्त हुई हैं। उन्होंने बताया कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में संरक्षित लगभग एक लाख पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ज्ञान-संपदा को सुरक्षित रखा जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही “एक भारत” की भावना के साथ आगे बढ़ा है। भाषा, खान-पान, वेशभूषा और पूजा-पद्धतियों में विविधता होने के बावजूद देश की सांस्कृतिक आत्मा सदैव एक रही है। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का उल्लेख करते हुए कहा कि देश-विदेश से लोग इस ऐतिहासिक अवसर से जुड़े। विभिन्न राज्यों से पवित्र नदियों का जल और मिट्टी लाई गई, वहीं श्रीलंका के राजदूत भी अशोक वाटिका की मिट्टी लेकर पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह भगवान श्रीराम के प्रति वैश्विक आस्था और भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

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