शहर में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लागू किया जा सकता है। इस तकनीक के तहत ट्रैफिक सिग्नल अब तय समय के बजाय सड़क पर मौजूद वाहनों की संख्या और ट्रैफिक दबाव के अनुसार काम करेंगे।
इस सिस्टम में लगे स्मार्ट कैमरे लगातार ट्रैफिक की निगरानी करेंगे और AI यह विश्लेषण करेगा कि किस दिशा में वाहनों की संख्या अधिक है। इसके आधार पर ग्रीन सिग्नल का समय अपने आप बढ़ाया या घटाया जा सकेगा, जिससे भीड़भाड़ वाले रास्तों पर जाम कम करने में मदद मिलेगी।
39 दिनों के ट्रायल में सामने आए सकारात्मक नतीजे
जयपुर ट्रैफिक पुलिस ने ‘डेटा कोर इन्फोटेक’ के सहयोग से रामबाग सर्किल पर इस तकनीक का 39 दिनों तक परीक्षण किया। यह पायलट प्रोजेक्ट 3 जून से 11 जुलाई तक चलाया गया, जिसमें अधिकारियों के अनुसार ट्रैफिक संचालन में सुधार देखने को मिला।
ट्रायल के दौरान बिना मानवीय हस्तक्षेप के करीब 4.88 लाख वाहनों की आवाजाही सुचारु रहने का दावा किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, विभिन्न लेन में वाहन चालकों के समय में 8 से 45 सेकंड तक की बचत दर्ज की गई और ट्रैफिक दबाव कम होने से प्रदूषण में भी कमी आई।
253 प्रमुख चौराहों पर लागू करने की तैयारी
जयपुर में कुल 423 चौराहों में से 253 प्रमुख चौराहों पर इस स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम को लागू करने की योजना बनाई जा रही है। पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी ट्रैफिक विभाग के अधिकारियों द्वारा की जा रही है।
ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर भी नजर रखेगा AI
AI आधारित यह सिस्टम केवल सिग्नल नियंत्रण तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंप, गलत दिशा में वाहन चलाने और लेन उल्लंघन जैसे मामलों की निगरानी की सुविधा भी होगी।
इसके अलावा, भविष्य में इस तकनीक को आपातकालीन सेवाओं के लिए भी विकसित करने की योजना है। इसके तहत एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसे वाहनों के लिए जरूरत के समय ग्रीन कॉरिडोर तैयार करने में मदद मिल सकती है।
AI आधारित ट्रैफिक सिस्टम लागू होने के बाद जयपुर में ट्रैफिक प्रबंधन को अधिक तेज, स्मार्ट और डेटा आधारित बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।


