मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को बांदा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दो महिलाओं को आंगनबाड़ी सहायिका पद के लिए नियुक्ति पत्र सौंपे। इसके साथ ही उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को चेक, प्रमाण पत्र, चाबी और अन्य सहायता सामग्री भी वितरित की।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बांदा की विकास यात्रा पर आधारित लघु फिल्म का अवलोकन किया। उन्होंने बच्चों का अन्नप्राशन कराया और महिलाओं को पोषण सामग्री से भरी पोटली वितरित की। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का निरीक्षण कर युवाओं और विभिन्न विभागों के स्टॉल पर मौजूद लोगों से संवाद किया।
बेसिक शिक्षा परिषद के स्टॉल पर मुख्यमंत्री ने ‘स्कूल चलो अभियान’ और बच्चों द्वारा तैयार किए गए मॉडल की जानकारी ली। उन्होंने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए उन्हें चॉकलेट भी दी। स्थानीय प्रशासन की ओर से मुख्यमंत्री को शजर पत्थर से निर्मित शिवालय स्मृति चिन्ह के रूप में भेंट किया गया।
इन लाभार्थियों को मिला सम्मान और सहायता
- पुष्पा देवी और पूजा को आंगनबाड़ी सहायिका पद के लिए नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया।
- रश्मि अग्रवाल और अजीत सिंह को मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का लाभ मिला।
- मंजू देवी और भारती सिंह को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 8.95 करोड़ रुपये से अधिक का चेक प्रदान किया गया।
- सरोज देवी को ई-रिक्शा की चाबी और सुमत देवी को सिलाई मशीन दी गई।
- अनिल कुमार को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत 5 लाख रुपये का चेक मिला।
- मूरतध्वज को ट्रैक्टर की चाबी सौंपी गई।
- मुलायम और अरविंद कुमार को आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए।
- गेनिया को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत 5 लाख रुपये का चेक दिया गया।
- अभिषेक सोनी को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत 7,500 रुपये का चेक मिला।
- अंशु को मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का स्वीकृति पत्र और रमेश प्रजापति को आवास योजना के तहत घर की चाबी दी गई।
- रामरतन को मुख्यमंत्री माटी कला टूल किट योजना के तहत विद्युत चालित चाक का प्रमाण पत्र मिला।
- वंदना गुप्ता को नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के तहत प्रमाण पत्र दिया गया।
- शोभाराम कश्यप को पक्षी संरक्षण कार्य के लिए आपदा विभाग की ओर से प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक सुविधाएं पहुंचाना है और लाभार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।


