चढ़ावा विवाद के बीच चर्चा में चंपत राय, क्या है उनकी भूमिका?

shikha verma
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अयोध्या स्थित राम मंदिर एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में है। इस बार वजह मंदिर निर्माण या श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या नहीं, बल्कि मंदिर के चढ़ावे और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवाल हैं। विपक्षी दलों और कुछ स्थानीय लोगों ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं, जबकि मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी अपनी पड़ताल कर रही है।

इन आरोपों के बीच सबसे अधिक चर्चा ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की हो रही है, जो मंदिर निर्माण परियोजना और ट्रस्ट के प्रशासनिक कार्यों में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

कौन हैं चंपत राय?

चंपत राय वर्तमान में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के उपाध्यक्ष हैं। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से आने वाले चंपत राय ने अपने करियर की शुरुआत रसायन शास्त्र के शिक्षक के रूप में की थी। बाद में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में कार्य किया और विहिप से जुड़ गए।

राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान उन्होंने संगठनात्मक रणनीति, कानूनी समन्वय और आंदोलन के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आंदोलन के प्रमुख चेहरों के पीछे रहकर रणनीतिक कार्यों को संभालने के कारण उन्हें विहिप के प्रभावशाली नेताओं में गिना जाने लगा।

ट्रस्ट में क्या है भूमिका?

सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले के बाद 2020 में गठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चंपत राय को महासचिव बनाया गया। ट्रस्ट की प्रशासनिक गतिविधियों, मंदिर निर्माण परियोजना, दान प्रबंधन, विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय और आधिकारिक संवाद की जिम्मेदारी मुख्य रूप से उनके पास है।

राम मंदिर से जुड़ी अधिकांश महत्वपूर्ण घोषणाओं और निर्णयों में वे ट्रस्ट का प्रमुख सार्वजनिक चेहरा रहे हैं।

विवाद और आरोप

हाल के दिनों में मंदिर के चढ़ावे और वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई सवाल उठे हैं। समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी दलों ने ट्रस्ट से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। हालांकि ट्रस्ट ने आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि सभी वित्तीय प्रक्रियाएं नियमित ऑडिट के दायरे में हैं।

चंपत राय ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि दान और चढ़ावे की गिनती तथा ऑडिट प्रक्रिया में ट्रस्ट के सदस्य, कार्यकर्ता और बैंक अधिकारी शामिल रहते हैं तथा अब तक किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने नहीं आई है।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

साल 2021 में ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीन के सौदों को लेकर भी विवाद हुआ था। विपक्षी दलों ने भूमि खरीद में अनियमितता के आरोप लगाए थे। उस समय भी चंपत राय और ट्रस्ट ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया था कि भूमि खरीद पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत की गई थी।

जांच पर टिकी निगाहें

राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में ट्रस्ट पर लगे आरोपों और उनके जवाबों को लेकर लोगों की नजरें जांच एजेंसियों पर टिकी हैं। एसआईटी की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी।

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