बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी नामक व्यक्ति के पुलिस एनकाउंटर के बाद विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस ने 16 जून को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में भरत भूषण को “मानसिक रूप से अस्वस्थ” बताया था और उनके इलाज की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी। हालांकि, अगले ही दिन पुलिस कार्रवाई के दौरान उन्हें गोली लगी और बाद में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
पुलिस के अनुसार, भरत भूषण सोशल मीडिया पर एक सरकारी अधिकारी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां और धमकी भरे संदेश पोस्ट कर रहे थे। जब पुलिस उनसे संपर्क करने पहुंची तो उन्होंने हथियार निकाल लिया और बाद में पुलिस तथा सुरक्षा बलों पर फायरिंग की। पुलिस का दावा है कि आत्मरक्षा और आम लोगों की सुरक्षा के लिए गोली चलानी पड़ी।
दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में भरत भूषण पुलिस की ओर अपनी पिस्टल फेंकते हुए दिखाई देते हैं। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसी आधार पर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि भरत भूषण ने आत्मसमर्पण कर दिया था और उन्हें जीवित पकड़ा जा सकता था।
भरत भूषण के पिता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें थाने में बैठाकर रखा और उनके बेटे को गोली मार दी। उनकी मां का कहना है कि उनका बेटा क्षेत्रीय समस्याओं को उठा रहा था और यदि उसने सरेंडर कर दिया था तो उसके खिलाफ घातक बल का इस्तेमाल क्यों किया गया।
भोजपुर पुलिस का कहना है कि भरत भूषण लगातार फायरिंग कर रहा था और सुरक्षा बलों को कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं, मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी नेताओं ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि बिहार में हाल के महीनों में पुलिस एनकाउंटर की घटनाओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज रही है। अब इस घटना में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि भरत भूषण मानसिक रूप से अस्वस्थ थे और उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था, तो पुलिस की कार्रवाई किस परिस्थिति में की गई। इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।


