अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद सामने आया है। इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा को जन्म दिया है।
विवाद की शुरुआत
7 जून 2026 को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया कि राम मंदिर के चढ़ावे की करोड़ों रुपये की राशि में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है।
सरकार की कार्रवाई
आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। टीम में वरिष्ठ प्रशासनिक, पुलिस और वित्तीय अधिकारी शामिल हैं। एसआईटी अयोध्या पहुंचकर मामले की जांच कर रही है और अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।
विपक्ष की मांग
समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी दलों ने एसआईटी की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट या उच्च न्यायालय की निगरानी में जांच कराने की मांग की है। सांसद अवधेश प्रसाद ने मामले को गंभीर बताते हुए ट्रस्ट के सदस्यों को जांच पूरी होने तक हटाने की मांग की है।
पूर्व लेखा प्रभारी के आरोप
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने एक साक्षात्कार में दावा किया कि चढ़ावे की राशि और धातु संबंधी दान के प्रबंधन में अनियमितताएं हुई थीं। उनका कहना है कि शिकायत करने के बाद उन्हें जिम्मेदारी से हटा दिया गया। हालांकि उन्होंने हाल में मीडिया से विस्तृत बातचीत करने से इनकार किया है।
ट्रस्ट का पक्ष
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सभी आरोपों को खारिज किया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि चढ़ावे की गणना और लेखा-जोखा नियमित ऑडिट प्रक्रिया के तहत किया जाता है तथा अब तक किसी बड़ी गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा की प्रतिक्रिया
भाजपा नेताओं का कहना है कि मामले की जांच होनी चाहिए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं पार्टी ने विपक्ष पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है।
वर्तमान स्थिति
फिलहाल मामले की जांच एसआईटी कर रही है। अभी तक किसी जांच एजेंसी ने चढ़ावे में गड़बड़ी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।


