आज के डिजिटल दौर में बैंकिंग, UPI पेमेंट और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर फ्रॉड के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अब ठग नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं, जहां कई बार बिना OTP बताए भी बैंक अकाउंट को खतरा हो सकता है।
पहले ठग खुद को बैंक अधिकारी बताकर लोगों से OTP हासिल करते थे, लेकिन अब उनके तरीके बदल गए हैं। वे डिलीवरी एजेंट, टेलीकॉम कर्मचारी, KYC अधिकारी या कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर कॉल करते हैं और लोगों को जल्दबाजी में जानकारी साझा करने के लिए दबाव डालते हैं। कई मामलों में फर्जी कॉलर आईडी और AI-जनरेटेड आवाज का भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे कॉल असली लगती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, कई स्कैम में ठग लोगों को स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करने के लिए भी कहते हैं। इन ऐप्स की मदद से वे मोबाइल की स्क्रीन, बैंकिंग जानकारी और निजी डेटा तक पहुंच हासिल कर लेते हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे जरूरी सावधानी यह है कि अगर किसी अनजान कॉल पर OTP आता है तो पहले कॉल तुरंत काट दें और उसके बाद ही मैसेज को ध्यान से पढ़ें। इससे ठगों का दबाव खत्म हो जाता है और व्यक्ति सोच-समझकर फैसला ले पाता है।
पैसे सुरक्षित रखने के लिए विशेषज्ञ तीन अहम नियम बताते हैं—
- किसी भी स्थिति में OTP साझा न करें, क्योंकि बैंक या सरकारी एजेंसियां फोन पर OTP नहीं मांगतीं।
- डराने वाली कॉल जैसे अकाउंट ब्लॉक या सिम बंद होने की बातों पर तुरंत भरोसा न करें।
- किसी भी संदेह की स्थिति में संबंधित संस्था के आधिकारिक नंबर पर खुद संपर्क करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी और सही आदतें अपनाकर बड़े साइबर फ्रॉड से बचा जा सकता है।


