डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से क्यों नाराज हैं भारतीय-अमेरिकी? मिडटर्म इलेक्शन पर दिखेगा असर

Nikhil Malhotra
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मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले एशियाई और प्रशांत द्वीपसमूह मूल (AAPI) के मतदाताओं पर किए गए एक बड़े राष्ट्रीय सर्वेक्षण में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सर्…

मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले एशियाई और प्रशांत द्वीपसमूह मूल (AAPI) के मतदाताओं पर किए गए एक बड़े राष्ट्रीय सर्वेक्षण में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सर्वे के मुताबिक, भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लगभग 66 फीसदी मतदाता हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स यानी प्रतिनिधि सभा और सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन देने की योजना बना रहे हैं, जबकि रिपब्लिकन उम्मीदवारों को सिर्फ 22 प्रतिशत समर्थन मिलता दिख रहा है

यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय-अमेरिकी वोट बैंक में अच्छी-खासी सेंध लगाई थी। लेकिन अपने कार्यकाल के दौरान अपनाई गई नीतियों के कारण ट्रंप इस समुदाय का भरोसा खोते दिख रहे हैं

भारतीय-अमेरिकी समुदाय के ट्रंप से दूर जाने और डेमोक्रेट्स के करीब आने के पीछे कई प्रमुख कारण और नीतियां जिम्मेदार हैं। दरअसल, भारतीय-अमेरिकी समुदाय का एक बड़ा हिस्सा उच्च-कुशल पेशेवर (IT/Tech) है। ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीजा के नियमों को कड़ा करने, इमिग्रेशन पर सख्ती बढ़ाने और अप्रवासियों (Immigrants) को लक्षित करने वाली नीतियों से भारतीय समुदाय में भारी असुरक्षा और नाराजगी है

इस सर्वे में 86 फीसदी से अधिक भारतीय-अमेरिकियों ने बढ़ती महंगाई, स्वास्थ्य देखभाल के खर्च और आवास/किराए को अपने चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा माना है। आर्थिक मोर्चे पर 45% भारतीय मतदाता डेमोक्रेट्स पर भरोसा जता रहे हैं, जबकि ट्रंप प्रशासन पर केवल 16% को भरोसा है

ट्रंप के कार्यकाल के दौरान अमेरिका में बढ़ी नस्लीय बयानबाजी और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ बढ़ते नफरती अपराधों ने भी भारतीय-अमेरिकियों को रिपब्लिकन पार्टी से दूर धकेला है। लगभग 68% मतदाताओं ने नस्लवाद और भेदभाव को गंभीर चिंता का विषय बताया है। इसके साथ ही टैरिफ, व्यापारिक कड़वाहट और वैश्विक कूटनीतिक तनाव के कारण भारत-अमेरिका संबंधों में आई असहजता से भी भारतीय-अमेरिकी मतदाता खुद को असहज महसूस कर रहे हैं

AAPI Data और कार्नेगी एंडोमेंट के हालिया अध्ययनों के अनुसार 71% भारतीय-अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में ट्रंप के कामकाज से असंतुष्ट हैं। संपूर्ण एशियाई-अमेरिकी (AAPI) समुदाय में ट्रंप की नापसंदगी दर लगभग 70% तक पहुँच गई है। 2024 में ट्रंप को जहां लगभग 32% भारतीय-अमेरिकियों का समर्थन मिला था, वहीं अब रिपब्लिकन पार्टी की पकड़ घटकर 18-22% पर सिमट गई है

ट्रंप की लोकप्रियता सिर्फ भारतीय-अमेरिकी समुदाय तक ही सीमित रूप से नहीं गिरी है, बल्कि कई अन्य सामाजिक और जनसांख्यिकीय वर्गों में भी भारी गिरावट देखी गई है। अन्य एशियाई-अमेरिकी समुदाय चीनी-अमेरिकी, जापानी-अमेरिकी और कोरियाई-अमेरिकी मतदाताओं के बीच भी ट्रंप की लोकप्रियता काफी कम हुई है। विशेष रूप से उपनगरीय शिक्षित महिलाएं ट्रंप की नीतियों और उनके बयानों से दूर जा रही हैं

इमिग्रेशन क्रैकडाउन (ICE की कार्रवाइयों) और सामूहिक निर्वासन (Mass Deportations) की धमकियों के चलते लैटिनो वर्ग में भी ट्रंप के प्रति आक्रोश बढ़ा है। युवा मतदाता शिक्षा, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दों पर युवा वर्ग ट्रंप प्रशासन से भारी असंतुष्ट है

एक जानकारी के मुताबिक एरिज़ोना, जॉर्जिया, नेवादा, उत्तरी कैरोलिना और पेनसिल्वेनिया जैसे ‘स्विंग स्टेट्स’ (Swing States) में एशियाई-अमेरिकी और भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं की संख्या निर्णायक स्थिति में है। भारतीय-अमेरिकियों का उच्च मतदान प्रतिशत डेमोक्रेटिक पार्टी को प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में बहुमत हासिल करने या बनाए रखने में मदद कर सकता है।

यदि यह ट्रेंड वोटिंग के दिन तक कायम रहता है, तो ट्रंप प्रशासन को अपने कार्यकाल के बचे हुए समय में कड़े विधायी विरोध का सामना करना पड़ेगा

स्रोत: readnownews.in

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