बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत अभियान तेज, योगी सरकार ने बढ़ाई निगरानी

shikha verma
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प्रदेश में सरयू-घाघरा समेत कई नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। शासन स्तर से लेकर जिला प्रशासन तक राहत कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है। प्रभावित परिवारों तक भोजन, पेयजल, दवाएं और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाने के साथ राहत शिविरों में व्यवस्थाओं को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

इसी क्रम में राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फर्रूखाबाद, बलिया और बहराइच में संचालित राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने राहत शिविरों की व्यवस्थाओं का लाइव जायजा लिया और वहां रह रहे बाढ़ प्रभावित लोगों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याओं तथा उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली।

राहत शिविरों में व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत परखी

राहत आयुक्त ने अधिकारियों से शिविरों में साफ-सफाई, भोजन, स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा सुविधाओं और दवाओं की उपलब्धता की जानकारी ली। फर्रूखाबाद के रहमानिया इंटर कॉलेज स्थित राहत शिविर में उन्होंने बाढ़ प्रभावित अब्दुल गफ्फार खान से संवाद किया। उन्होंने बताया कि वह छह सदस्यीय परिवार के साथ एक अगस्त से शिविर में रह रहे हैं और उन्हें भोजन, पानी, साफ-सफाई तथा दवाओं समेत आवश्यक सुविधाएं नियमित रूप से मिल रही हैं।

बहराइच में राहत आयुक्त ने मिहपुरवा स्थित कम्पोजिट विद्यालय आनंद नगर बरखड़िया के राहत शिविर की व्यवस्थाओं की जानकारी उप जिलाधिकारी मोनालिसा जौहरी से ली। उन्होंने शिविर में रह रहे प्रभावित शिवकुमार निषाद से भी बातचीत की। शिवकुमार ने बताया कि शिविर में चारपाई, गद्दे, नाश्ता और भोजन समेत जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

जलस्तर में कमी आने के बाद कई प्रभावित परिवारों ने घर लौटना शुरू कर दिया है। ऐसे परिवारों को प्रशासन की ओर से राशन किट और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

बलिया में राहत आयुक्त ने बैरिया के गोपल नगर टांडी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय स्थित राहत शिविर की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश देने के साथ बाढ़ प्रभावित पप्पू यादव से भी संवाद किया। उन्होंने बताया कि शिविर में तीनों समय भोजन, स्वच्छ पानी, साफ-सफाई और दवाओं की व्यवस्था है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी विशेष प्रबंध किए गए हैं।

महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष फोकस

समीक्षा के दौरान राहत आयुक्त ने तीनों जिलों के अधिकारियों को राहत शिविरों में मूलभूत सुविधाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों को भोजन, स्वच्छ पेयजल और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की जरूरतों को देखते हुए आवश्यकतानुसार अतिरिक्त व्यवस्थाएं करने के निर्देश भी दिए। साथ ही राहत शिविरों में साफ-सफाई और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर बनाए रखने पर जोर दिया।

अयोध्या में 11 गांव बाढ़ प्रभावित

प्रदेश के अन्य बाढ़ प्रभावित जिलों में भी राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं। अयोध्या में सरयू (घाघरा) नदी का जलस्तर बढ़ने के बावजूद जिला प्रशासन की सक्रियता से राहत कार्य लगातार संचालित किए जा रहे हैं। जिले के 11 गांव वर्तमान में बाढ़ से प्रभावित हैं।

प्रभावित क्षेत्रों में अब तक 2,370 राहत किट और 1,450 लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। पशुओं के लिए 350 कुंतल भूसा भी उपलब्ध कराया गया है। जिले में बनाए गए 14 बाढ़ शरणालयों में से सहारा बाग शरणालय में 100 प्रभावित लोग रह रहे हैं।

बाढ़ की निगरानी के लिए 10 बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं और 18 नावों के माध्यम से निगरानी एवं राहत कार्य किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की 37 टीमों ने प्रभावित क्षेत्रों में 1,224 ओआरएस पैकेट और 2,912 क्लोरीन टैबलेट वितरित किए हैं। पशु चिकित्सा विभाग की 21 टीमें टीकाकरण शिविरों के माध्यम से पशुओं को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं।

अयोध्या में नदी का जलस्तर खतरे के निशान 92.730 मीटर से 0.310 मीटर ऊपर 93.040 मीटर दर्ज किया गया है। प्रशासन की ओर से जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।

आजमगढ़ में खतरे के निशान के करीब घाघरा

आजमगढ़ में भी घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचने के बाद प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। उल्टहवा गेज पर नदी का जलस्तर 76.30 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि खतरे का निशान 76.60 मीटर है।

इस्माइलपुर, बदरहुआ और डिघिया गेजों पर भी जलस्तर में वृद्धि दर्ज की जा रही है। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया है। हालांकि टोंस नदी का जलस्तर फिलहाल स्थिर बना हुआ है।

प्रदेश सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है। प्रशासन का फोकस प्रभावित परिवारों तक समय पर राहत सामग्री पहुंचाने और राहत शिविरों में आवश्यक सुविधाएं बनाए रखने पर है। जलस्तर सामान्य होने तक संबंधित जिलों में प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है।

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