अखिलेश यादव ने ब्राह्मणों को PDA में जोड़ा, यूपी चुनाव 2027 से पहले सपा का बड़ा सियासी दांव

shikha verma
3 Min Read

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी (सपा) ने ब्राह्मण समुदाय को साधने की रणनीति के तहत एक सम्मेलन आयोजित किया। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस कार्यक्रम में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की अवधारणा का विस्तार करते हुए ब्राह्मणों को भी इसमें शामिल करने की बात कही।

जनेश्वर मिश्र की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने कहा कि सिर्फ ब्राह्मण ही नहीं, बल्कि हर वर्ग के लोग परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीतियों से लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अखिलेश ने कहा कि जितना दबाव और पीड़ा बढ़ेगी, PDA उतना ही मजबूत होगा।

अखिलेश यादव ने मंच से कृष्ण और सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हुए सामाजिक एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि PDA का मतलब केवल राजनीतिक समीकरण नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति की भागीदारी है जो खुद को उपेक्षित महसूस करता है।

सपा प्रमुख ने अपने संबोधन में प्रदेश की कानून व्यवस्था और सरकार की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कई पुराने मुद्दों का जिक्र करते हुए सरकार पर निशाना साधा और कहा कि जनता आने वाले समय में बदलाव का फैसला करेगी।

अयोध्या सीट और पवन पांडेय को लेकर दावा

कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने अयोध्या से सपा नेता पवन पांडेय की जीत का दावा किया। उन्होंने कहा कि पार्टी ब्राह्मण समाज को सम्मान और उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए काम करेगी। साथ ही उन्होंने पार्टी छोड़कर गए नेताओं पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि अब संगठन में नई जिम्मेदारियां तय हो चुकी हैं।

ब्राह्मण वोट बैंक पर सपा की नजर

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका को देखते हुए सपा का यह सम्मेलन अहम माना जा रहा है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग शामिल हुए। नेताओं ने अखिलेश यादव को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित भी किया।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, सपा का यह प्रयास आगामी चुनावों के लिए सामाजिक समीकरण मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

बृजेश पाठक ने साधा निशाना

वहीं, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने सपा के इस कार्यक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी केवल तुष्टिकरण की राजनीति करती है और उसके पास विकास का कोई एजेंडा नहीं है।

ब्राह्मण सम्मेलन के जरिए सपा ने चुनावी तैयारियों के बीच अपने सामाजिक गठबंधन को मजबूत करने का संदेश देने की कोशिश की है। अब देखना होगा कि यह रणनीति आगामी चुनाव में कितना प्रभाव डालती है।

Share This Article
Leave a Comment