उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले बयानबाजी तेज हो गई है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर सवाल उठाते हुए सपा पर कई राजनीतिक आरोप लगाए।
एबीपी न्यूज से बातचीत में संजय निषाद ने कहा कि अखिलेश यादव ने अपने PDA फॉर्मूले का स्वरूप बदल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान गैर-यादव पिछड़े और गैर-मुस्लिम समुदायों की उपेक्षा की जाती थी। उनके अनुसार, सत्ता में रहते हुए कुछ सीमित वर्गों को अधिक लाभ मिला, जबकि अन्य समुदायों को अपेक्षित प्रतिनिधित्व और अवसर नहीं मिले।
कैबिनेट मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के नेतृत्व और प्रवक्ताओं द्वारा समय-समय पर ब्राह्मण समाज के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। उन्होंने दावा किया कि इससे समाज के एक वर्ग की भावनाएं आहत हुईं।
निषाद समुदाय के आरक्षण के मुद्दे पर संजय निषाद ने सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ कुछ सीमित जातियों तक ही अधिक पहुंचा। उन्होंने दोहराया कि उनकी पार्टी लंबे समय से निषाद समुदाय को अनुसूचित जाति (SC) की सूची में शामिल किए जाने की मांग करती रही है और इस संबंध में सरकार के समक्ष अपना पक्ष रख चुकी है।
इस बीच, समाजवादी पार्टी ने अयोध्या से पवन पांडेय को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। पवन पांडेय वर्ष 2012 में अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव जीत चुके हैं और पूर्व में राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। हाल के दिनों में वे राम मंदिर दान से जुड़े विवादित आरोपों को लेकर भी मुखर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके नाम की घोषणा को आगामी चुनावी रणनीति के तहत देखा जा रहा है।
कि इस पूरे मामले में विभिन्न दल अपने-अपने राजनीतिक दृष्टिकोण और दावे सामने रख रहे हैं। इन आरोपों और प्रत्यारोपों पर संबंधित पक्षों की अलग-अलग राय है।


