कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने बिलकिस बानो गैंगरेप मामले के दोषियों की रिहाई का समर्थन किया था। राहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने लोकसभा में नए शिक्षा मंत्री को लेकर सवाल उठाए। इसके बाद राहुल गांधी ने संसद के बाहर कहा कि सरकार ने ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाया है, जो “बलात्कारियों का बचाव करते हैं।”
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन और नीट पेपर लीक विवाद के बीच सरकार ने प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री का पद संभालने वाले व्यक्ति को लेकर महिलाओं और छात्रों के बीच गलत संदेश गया है।
प्रल्हाद जोशी ने आरोपों को बताया गलत
प्रल्हाद जोशी ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने लोकसभा में कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप गलत हैं और बिना प्रमाण के बयान दिए गए हैं।
जोशी ने कहा कि किसी भी आरोप को लगाने से पहले उसे प्रमाणित करना चाहिए। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से मांग की कि इस तरह की टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाया जाए और प्रियंका गांधी को माफी मांगनी चाहिए।
क्या था प्रल्हाद जोशी का पुराना बयान?
यह मामला साल 2022 के एक बयान से जुड़ा है, जब गुजरात सरकार ने बिलकिस बानो गैंगरेप मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे 11 दोषियों को रिहा किया था।
उस समय तत्कालीन केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी से एक टीवी चैनल ने इस फैसले पर सवाल किया था। जोशी ने कहा था कि अगर सरकार और संबंधित अधिकारियों ने कानूनी प्रक्रिया के तहत फैसला लिया है तो इसमें उन्हें कुछ गलत नहीं लगता।
उन्होंने यह भी कहा था कि लंबे समय तक जेल में रहने वाले दोषियों के लिए कानून में रिहाई का प्रावधान होता है।
बाद में जनवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया था, जिसके तहत दोषियों की सजा में छूट देकर उन्हें रिहा किया गया था।
इस पूरे मामले को लेकर अब कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।


