संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में उस समय तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने स्पीकर ओम बिरला की कार्यवाही पर आपत्ति जताई।
दरअसल, स्पीकर ओम बिरला ने सदन में कहा कि सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा को लेकर सहमति बन गई है और सरकार इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस की ओर से एक सदस्य और संसदीय कार्य मंत्री को अपनी बात रखने का अवसर दिया।
इस पर अखिलेश यादव ने नाराजगी जताते हुए कहा कि केवल कांग्रेस और सरकार को बोलने का मौका दिया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या दोनों पक्षों के बीच पहले से कोई समझौता हो गया है। इस पर स्पीकर ने जवाब दिया कि विपक्षी दलों के आपसी मतभेदों का समाधान करना उनकी जिम्मेदारी नहीं है।
अखिलेश यादव की इस टिप्पणी को विपक्षी दलों के बीच नेतृत्व और राजनीतिक भूमिका को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस पर किसी भी विपक्षी दल की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इससे पहले 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए विपक्ष के प्रदर्शन में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए थे। वहीं, आम आदमी पार्टी ने उस प्रदर्शन को लेकर अलग रुख अपनाया था।
हंगामे की वजह से नहीं चल सका प्रश्नकाल
मानसून सत्र के तीसरे दिन लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विपक्ष के हंगामे के कारण प्रश्नकाल प्रभावित रहा। शोर-शराबे के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक और बाद में 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
इस दौरान विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन किया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी दलों के सांसद शामिल रहे।


